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लॉकडाउन ने लोगों को याद दिलाई रामायण, 30 साल पहले भी सड़को पर इसी तरह लग जाता था ‘कर्फ्यू’

आज से करीब 32 साल पहले टीवी के छोटे पर्दे पर 2 धारावाहिक ‘महाभारत और रामायण’ का प्रसारण शुरु हुआ था। उसी में से एक धारावाहिक महाभारत की शुरुआत एक ऐसे डायलॉग के साथ होती थी जो आज की स्थिती पर सटीक बैठता है। महाभारात के शुरुआत का डायलॉग ‘मैं समय हूं और मैं दोहराता हूं’ आज के समय में एक दम फिट बैठता है। इस समय कोरोना वायरस के चलते देश भर में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर 14 अप्रैल तक किसी को भी बेफिजूल घरों से बाहर जाने की अनुमती नहीं है।

लॉकडाउन के बाद से ही सड़के सुनसान है। घरों के बाहर बच्चों की चहल-पहल सुने मानो जमाना सा हो गया हो। ऐसा ही समय आज से ठीक 32 साल पहले था जब रामायण और महाभारत के चलते सड़को पर कर्फ्यू जैसा माहौल बन जाता था। अब 32 साल बाद कोरोना के चलते सड़कों पर क‌र्फ्यू जैसे हालात हैं और लोग डीडी नेशनल पर घरों में बैठ कर भारत सरकार द्वारा पुनः प्रसारित की गई महाभारत और रामायण देख रहे हैं। हालांकि उस समय के दौर से आज का समय काफी अलग है लेकिन दर्शकों में सालों बाद भी रामायण और महाभारत को लेकर उसी तरह का उत्साह देखने को मिल रहा है।

साल 1987 में रामानन्द सागर ने रामायण बनाई। उसके 2 ही साल बाद महाभारत का प्रसारण शुरु हुआ। इन दोनों ही धारावाहिक के शुरु होते ही सड़कों पर सन्नाटा हो जाता था। मानों साक्षात भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने टीवी के जरिए घरों में उतर आए हो। जिन घरों में टीवी की व्यवस्था नहीं थी, वो दूसरों के घरों में टीवी देखने जाते थे। तब न तो हाथ में रिमोट था, न इतने सारे चैनलों के विकल्प। लोग विज्ञापनों को भी मजे से देखते थे। आज के समय में कई घर ऐसे हैं जिनकी तीन पीढ़ियों ने महाभारत और रामायण देखी। इन दो धारावाहिक में सबसे ज्यादा उत्साह रामायण का रहता था।

सुबह 9 बजते ही लोग खुद को घरों में लॉकडाउन कर लेते थे। सरकारी कर्मचारी भी इस दौरान किसी भी तरह का कोई काम नहीं करते थे। लोग मंदिरो के कपाट की तरह लोगों के घरों के दरवाजे खुलने का इंतजार करते थे। सुबह से ही घरों की छतों पर 100 दिशाओं में लोग एंटीना घुमाते नजर आते थे। हालांकि आज एंटीना को घुमाकर एडजस्ट करना शायद ही दिखाई देता हो। बचपन में रामायण की धुन सुनकर लोग टीवी की ओर भागा करते थे। कुछ दर्शक तो टीवी के सामने ही अगरबत्ती जलाकर बैठ जाते थे। रामायण का प्रसारण 78 ऐपिसोड के साछ हुआ था। आज सरकार ने एक बार फिर रामायण और महाभारत को प्रसारित कर लोगों की पुरानी यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है। लॉकडाउन के बीच खाली सड़कों को देखकर वही रामायण वाला दौर याद आने लगा है।

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